जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर व्यवस्था अब जिला अस्पतालों के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है। उप जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) से गर्भवती महिलाओं को लगातार ‘हाई रिस्क’ बताकर रेफर किए जाने के कारण, जिले के करीब 60 प्रतिशत प्रसव का भार अकेले राजकीय भगवानदास खेतान (बीडीके) अस्पताल झेल रहा है। इस रेफरल की चेन ने न केवल सरकारी स्वास्थ्य ढांचे पर दबाव बढ़ाया है, बल्कि गरीब और ग्रामीण गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम भी पैदा कर दिया है। बीडीके अस्पताल: रेफरल का केंद्र, 36% मामले बाहर से आए राजकीय बीडीके अस्पताल जिले में प्रसव सेवाओं का मुख्य केंद्र बन गया है। जनवरी 2025 से 24 अक्टूबर तक, बीडीके अस्पताल में 2629 प्रसव हुए हैं, जिनमें 1565 नॉर्मल और 964 सिजेरियन प्रसव शामिल हैं। पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू के अनुसार, अस्पताल में हुए कुल प्रसव मामलों में से 36 प्रतिशत से अधिक ऐसे मामले हैं जो जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर आए हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी और हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं को बड़े अस्पतालों में रेफर करने की मजबूरी के कारण बीडीके पर लगातार बोझ बना रहता है। बीडीके अस्पताल में प्रसव का बढ़ता ग्राफ (मई से अक्टूबर 2025) | माह | कुल प्रसव | सामान्य प्रसव | सिजेरियन | मई | 331 | 214 | 117 | | जून | 370 | 243 | 127 | | जुलाई | 445 | 275 | 170 | | अगस्त | 495 | 303 | 192 | | सितंबर | 573 | 322 | 191 | | अक्टूबर | 475 | 208 | 167 | | कुल योग | 2689 | 1565 | 964 | सीएचसी पर सेवाएं ठप: रेफर के डर से निजी अस्पतालों में रुझान जिले की प्रसव सेवाओं की सबसे गंभीर स्थिति 35 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर है। सीधे रेफर की प्रवृत्ति: अधिकांश केंद्र गर्भवती महिलाओं को ‘हाई रिस्क’ बताकर सीधे जिला अस्पताल रेफर कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई सीएचसी ऐसे हैं, जहाँ एक भी प्रसव दर्ज नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई निष्प्रभावी: इस लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले भी दर्जनभर से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हालात में कोई सुधार नहीं आया है। निजी अस्पतालों को बढ़ावा: सरकारी अस्पतालों में बिस्तर न मिलने या रेफर होने के डर से, कई गर्भवती महिलाएं अब निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं, जहाँ माना जाता है कि सिजेरियन प्रसव को अधिक बढ़ावा मिल रहा है। उप जिला अस्पतालों में चिंताजनक रेफरल स्थिति (जनवरी 2025 से) खेचड़ी में प्रसव का लगभग आधा हिस्सा रेफर कर दिया गया है, और दोनों अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का आंकड़ा शून्य होना यह दर्शाता है कि हाई रिस्क मामलों को स्थानीय स्तर पर संभाला ही नहीं जा रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि इन केंद्रों पर ऑपरेशन थिएटर की सुविधा या प्रशिक्षित विशेषज्ञों का उपयोग नहीं हो रहा है। नवलगढ़ जिला अस्पताल: रेफरल रिकॉर्ड की कमी जिले में बीडीके के बाद नवलगढ़ जिला अस्पताल प्रसव सेवाएं प्रदान करने वाला एक अन्य प्रमुख केंद्र है। प्रसव आंकड़े: 1 जनवरी 2025 से अक्टूबर तक यहाँ 1479 प्रसव हुए हैं, जिनमें 1102 सामान्य और 372 सिजेरियन प्रसव शामिल हैं। रिकॉर्ड में कमी: पीएमओ डॉ. महेंद्र कुमार सबलानिया ने बताया कि उनके पास ब्लॉक और अन्य अस्पतालों से रेफर होकर आए मामलों का कोई अलग से रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, क्योंकि सभी महिलाओं की नई रजिस्ट्रेशन पर्ची कटवाई गई है।


