मध्यप्रदेश में भोपाल सहित पूरे प्रदेश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान 14 लाख 88 हजार 240 ऐसे वोटर पाए गए हैं, जिनके नाम 2003 की वोटर लिस्ट से मैच नहीं हो रहे। इनका कोई लिंक न तो ब्लड रिलेशन से मिल रहा है और न ही वोटर लिस्ट में नाम दर्ज है। ऐसे वोटरों के नाम कटना तय माना जा रहा है। शनिवार शाम तक भोपाल की 7 विधानसभाओं में 2,11,173 वोटर नो-मैपिंग में पाए गए, जो भोपाल के कुल वोटर्स के 9.93% हैं। नो-मैपिंग में दूसरे नंबर पर जबलपुर (7.22%), तीसरे पर ग्वालियर (7.07%), चौथे पर इंदौर (6.18%) और पांचवें पर मुरैना (4.29%) हैं। निर्वाचन आयोग के अफसरों ने सभी जिला प्रशासन को नो-मैपिंग वाले वोटरों की क्रॉस-चेकिंग करने की हिदायत दी है, ताकि नोटिस जारी करने में कोई समस्या न आए। भोपाल की द.-पश्चिम विधानसभा को शनिवार शाम तक 100 फीसदी काम पूरा करने की डेडलाइन थी, लेकिन वीआईपी वोटरों के गणना पत्रक जमा न होने से काम पूरा नहीं हो पाया। मुख्य सचिव अनुराग जैन का गणना पत्रक शनिवार शाम को जमा हुआ। अभी 1,600 वोटरों का डिजिटलीकरण बाकी है, जिसमें आईएएस, आईपीएस भी हैं। उत्तर, मध्य और हुजूर विधानसभा में 100 फीसदी डिजिटाइजेशन इधर, एसआईआर का 33वां दिन शनिवार को संपन्न हुआ। उत्तर, मध्य और हुजूर विधानसभा में 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने दावा किया है कि रविवार को दक्षिण-पश्चिम और नरेला विधानसभा, गोविंदपुरा में भी 100 प्रतिशत वेरिफिकेशन हो जाएगा। सबसे पहले बैरसिया विधानसभा की टीम ने 100 प्रतिशत वोटर वेरिफिकेशन पूरा किया था। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक, सातों विधानसभाओं में कुल 21,25,908 वोटर दर्ज हैं। जिले के 2029 बीएलओ ने 3,93,000 वोटरों को मृतक, एबसेंट, शिफ्टेड, रिपीटेड और बिना साइन की श्रेणी में दर्ज किया है। इनका पब्लिक ऑडिट शनिवार से शुरू होगा। जिन विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर का काम पूरा हो चुका है, वहां बीएलओ प्रत्येक पोलिंग बूथ पर गणना पत्रक पढ़ेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि मृतक में दर्ज कोई व्यक्ति जीवित तो नहीं है। यह प्रक्रिया राजनीतिक बीएलए की मौजूदगी में होगी। रोजाना बैठक की वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी कर रिपोर्ट जिला निर्वाचन कार्यालय भेजी जाएगी। यह काम 10 दिसंबर तक चलेगा और 11 दिसंबर को एसआईआर का ड्राफ्ट रोल पब्लिश किया जाएगा। 3,93,000 नाम बिना नोटिस कटेंगे, जबकि 2,11,000 नो-मैपिंग वाले मतदाताओं को नोटिस देकर दस्तावेज मांगे जाएंगे।


